नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025 – सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए व्यक्तियों को राहत प्रदान करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्वाचन आयोग को आदेश दिया कि वे मतदाताओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अपने दावे दर्ज करने की अनुमति दें। इसके लिए आधार कार्ड या स्वीकार्य 11 दस्तावेजों में से किसी एक के साथ दावा प्रपत्र प्रस्तुत किया जा सकता है।
कोर्ट का आश्चर्य: राजनीतिक दलों की निष्क्रियता
शीर्ष अदालत ने बिहार में 65 लाख मतदाताओं के मतदाता सूची से बाहर होने के मामले में राजनीतिक दलों की निष्क्रियता पर आश्चर्य जताया। कोर्ट ने देखा कि राजनीतिक दल इस मामले में आपत्तियां दर्ज कराने के लिए आगे नहीं आए। पीठ ने बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया कि वे अदालती कार्यवाही में सभी राजनीतिक दलों को पक्षकार बनाएं। साथ ही, कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को आदेश दिया कि वे अगली सुनवाई तक उन दावा प्रपत्रों की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें, जिनके माध्यम से उन्होंने मतदाता सूची से बाहर हुए व्यक्तियों की सहायता की है। अगली सुनवाई 8 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है।
निर्वाचन आयोग को निर्देश और पारदर्शिता पर जोर
कोर्ट ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भौतिक रूप से दावा प्रपत्र जमा कराने वाले राजनीतिक दलों के बूथ स्तर के एजेंटों को पावती रसीद प्रदान करें। निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कोर्ट से 15 दिन का समय मांगा ताकि यह साबित किया जा सके कि कोई भी मतदाता सूची से बाहर नहीं हुआ है। द्विवेदी ने कहा, “राजनीतिक दल शोर मचा रहे हैं, लेकिन स्थिति उतनी खराब नहीं है। हमें विश्वास करें और हमें समय दें, हम दिखा देंगे कि कोई भी छूटा नहीं है।”
आयोग ने कोर्ट को सूचित किया कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल न होने वाले लगभग 85,000 मतदाताओं ने अपने दावे प्रस्तुत किए हैं, जबकि दो लाख से अधिक नए व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आगे आए हैं।
कोर्ट के पूर्व आदेश और पारदर्शिता पर बल
14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि वह 19 अगस्त तक 65 लाख मतदाताओं के मतदाता सूची से बाहर होने का विवरण प्रकाशित करे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस विवरण में नाम हटाने के कारणों को शामिल किया जाए। पीठ ने जोर देकर कहा, “पारदर्शिता से मतदाताओं का विश्वास बढ़ेगा।”
बिहार में हालिया एसआईआर प्रक्रिया ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा किया है। आयोग के अनुसार, एसआईआर के बाद बिहार में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 7.9 करोड़ से घटकर 7.24 करोड़ रह गई है।
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