🔴 कांच की बोतलें नहीं हैं सेफ! स्टडी में दावा—प्लास्टिक से भी 50 गुना ज़्यादा माइक्रोप्लास्टिक

📍 नई दिल्ली। अब तक सुरक्षित मानी जाने वाली कांच की बोतलें, असल में सेहत के लिए प्लास्टिक से भी ज़्यादा हानिकारक हो सकती हैं। फ्रांस की खाद्य सुरक्षा एजेंसी ANSES द्वारा किए गए एक चौंकाने वाले अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि कांच की बोतलों में प्लास्टिक की तुलना में 50 गुना अधिक माइक्रोप्लास्टिक कण पाए गए हैं


यह अध्ययन न केवल उपभोक्ताओं की पुरानी धारणा को तोड़ता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सुरक्षित पैकेजिंग को लेकर हमारी सोच में आमूलचूल बदलाव की आवश्यकता है।


🔍 क्या कहती है स्टडी?

जर्नल ऑफ फूड कंपोजीशन एंड एनालिसिस में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार:

  • कांच की बोतलों में प्रति लीटर औसतन 100 माइक्रोप्लास्टिक कण पाए गए।

  • बीयर की बोतलों में सबसे ज़्यादा – करीब 60 कण प्रति लीटर

  • नींबू पानी और आइस्ड टी में भी यह संख्या चिंताजनक रही।

  • तुलना करें तो प्लास्टिक की बोतलों में केवल 1.6 कण प्रति लीटर पाए गए।


🧪 माइक्रोप्लास्टिक के स्रोत क्या हैं?

अध्ययन का नेतृत्व कर रही पीएचडी स्कॉलर इसेलिन चैब ने बताया कि पहले यह मान लिया गया था कि कांच की बोतलों के कैप सुरक्षित होते हैं, लेकिन परीक्षण में यह बात सामने आई कि:

  • कांच की बोतलों के कैप्स पर लगे पेंट और बाहरी परतें, माइक्रोप्लास्टिक के बड़े स्रोत हैं।

  • ये कण आकार, रंग और रचना में ढक्कन के पेंट से मेल खाते हैं।

  • वाइन की बोतलों में माइक्रोप्लास्टिक कम पाए गए, क्योंकि वे कॉर्क स्टॉपर से सील की जाती हैं, न कि धातु के कैप से।


⚠️ क्या हैं स्वास्थ्य पर खतरे?

  • माइक्रोप्लास्टिक को मानव प्लेसेंटा, मस्तिष्क और फेफड़ों में पाया गया है।

  • यह हार्मोनल गड़बड़ी, कैंसर और तंत्रिका संबंधी बीमारियों से जुड़ा हो सकता है।

  • इन कणों की आकार में सूक्ष्मता के कारण शरीर इन्हें बाहर नहीं निकाल पाता।


🌍 बढ़ता प्लास्टिक संकट

  • 1950 में जहां 1.5 मिलियन टन प्लास्टिक बनता था, वहीं 2022 में यह बढ़कर 400 मिलियन टन हो गया।

  • बढ़ते प्लास्टिक उत्पादन के साथ माइक्रोप्लास्टिक का प्रसार माउंट एवरेस्ट से लेकर समुद्र की गहराई तक देखा गया है।


✅ क्या है समाधान?

ANSES ने एक समाधान सुझाया है:

  • बोतल कैप्स को इथेनॉल और पानी से धोने पर माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा तीन गुना तक कम हो सकती है।

  • कंपनियों को बोतल बंद करने की सुरक्षित तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई है।


📢 उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी

जो लोग आज भी कांच की बोतलों को प्लास्टिक से बेहतर मानते हैं, उन्हें अब सावधान हो जाना चाहिए। यह स्टडी दर्शाती है कि सिर्फ "प्राकृतिक" या "ग्लास" टैग से कोई चीज़ सुरक्षित नहीं हो जाती, जब तक कि उसकी पैकेजिंग प्रक्रिया पूरी तरह जांची-परखी न हो।

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