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पूर्व विधायक किशोर समरीते |
इन प्रमुख योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए:
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जल जीवन मिशन: पेयजल आपूर्ति की यह योजना कथित रूप से पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।
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स्मॉल होल्ड पोल्ट्री योजना (पशुपालन विभाग): बिना जमीनी काम के फंड निकाले जाने का आरोप।
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स्फूर्ति योजना (MSME मंत्रालय): बिना क्रियान्वयन के फर्जी भुगतान की बात कही गई।
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प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, RRP-1 और RCPLWE: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए बनी ये योजनाएं अधिकारियों-ठेकेदारों की सांठगांठ में डूबी बताई गईं।
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आयुष्मान भारत और कौशल विकास मिशन: दोनों योजनाओं में सेवा के बदले घोटालों का आरोप।
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बिजली मंत्रालय की योजनाएं (राजीव गांधी ग्रामीण विद्युत मिशन, सौभाग्य योजना, RDSS): वितरण और विद्युतीकरण से जुड़ी इन योजनाओं में भी घोटाले का संदेह।
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दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना: सस्ते भोजन की यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित बताई गई है।
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नमामि गंगे योजना (₹2355.55 करोड़): कथित भ्रष्टाचार के चलते इसका प्रभाव नगण्य।
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स्मार्ट सिटी योजना: ₹500 करोड़ के फर्जी भुगतान का आरोप, जमीनी काम नगण्य।
CBI जांच की मांग:
किशोर समरीते का कहना है कि यदि इन योजनाओं में CBI द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जाती है, तो जनता का विश्वास बहाल होगा और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई संभव हो सकेगी। उन्होंने मांग की है कि सबसे पहले प्रारंभिक अध्ययन के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक विशेषज्ञ दल मध्यप्रदेश भेजा जाए।
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