📍 नई दिल्ली | 23 जुलाई 2025
राजधानी दिल्ली में संसद भवन के पास स्थित एक मस्जिद में समाजवादी पार्टी (SP) नेताओं की मौजूदगी को लेकर भाजपा (BJP) और सपा के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा ने इसे “राजनीतिक बैठक” करार देते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव ने इसे “सामाजिक मेलजोल” बताया है।
🔍 क्या है मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल एक तस्वीर में सपा प्रमुख अखिलेश यादव, सांसद मोहिबुल्ला नदवी, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और जिया उर रहमान बर्क संसद भवन के पास स्थित मस्जिद में एकत्र दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा नेताओं ने इस तस्वीर के आधार पर आरोप लगाया कि सपा ने धार्मिक स्थल का राजनीतिक उपयोग किया है।
🔴 BJP ने साधा निशाना: धर्मनिरपेक्षता या वोटबैंक की राजनीति?
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि—
सपा नेता मस्जिद में राजनीतिक बैठक कर रहे हैं। ये वही लोग हैं जिन्होंने राम मंदिर के उद्घाटन (22 जनवरी 2024) को राजनीतिक कहकर उसका बहिष्कार किया था। यह ‘धर्मनिरपेक्षता’ नहीं, वोटबैंक के लिए किया जा रहा पाखंड है।
वहीं, प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने मस्जिद की तस्वीर साझा करते हुए सपा को "स्पष्ट रूप से हिंदू विरोधी" करार दिया।
🗣️ अखिलेश यादव का करारा जवाब: BJP डर फैलाती है, हम जोड़ने का काम करते हैं
भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा:
भाजपा नकारात्मक मानसिकता वाली पार्टी है। आस्था जोड़ने का काम करती है, और भाजपा हर उस चीज़ से घबराती है जो जोड़ती है। हम धर्म को बांटने का नहीं, जोड़ने का माध्यम मानते हैं। हम नफरत की राजनीति नहीं करते।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि—
धार्मिक स्थल नफरत का नहीं, मेलजोल का स्थान होते हैं। भाजपा जानबूझकर मुद्दों से ध्यान भटकाती है।
👩⚖️ डिंपल यादव की सफाई: इमाम साहब हमारे सांसद हैं
मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने कहा—
इमाम साहब हमारे सांसद हैं, उनकी पत्नी भी साथ थीं। हम वहां सिर्फ सामाजिक सौजन्यवश गए थे, कोई राजनीतिक बैठक नहीं हुई। भाजपा बार-बार ऐसी चालों से जनता को गुमराह करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा एसआईआर (मतदाता सूची संशोधन), पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है।
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✍️ संपादक: दयाल चंद यादव (MCJ)
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