📅 26 जुलाई 2025 | अक्षर सत्ता डेस्क
झालावाड़, राजस्थान। राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में शुक्रवार को घटित हुए सरकारी स्कूल भवन हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक घटना में 7 मासूम बच्चों की मौत हुई, जिनमें दो सगे भाई-बहन भी शामिल थे। मातम में डूबे गांव की फिजा में अब केवल रुदन और सन्नाटा है।
“भगवान मुझे ले जाता, मेरे बच्चों को छोड़ देता” – पीड़ित मां की चीख ने झकझोरा
इस हादसे में अपने दोनों बच्चों—6 वर्षीय बेटे कान्हा और 12 वर्षीय बेटी मीना—को खो चुकी एक मां ने बिलखते हुए कहा,
मेरे आंगन में अब खेलने वाला कोई नहीं बचा। मेरा सब कुछ चला गया। एक बेटा था, एक बेटी। काश भगवान मुझे ले जाता, मेरे बच्चों को छोड़ देता।
यह पीड़ा न सिर्फ एक मां की है, बल्कि उन सैकड़ों ग्रामीणों की है जो अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरने लगे हैं। इस त्रासदी ने राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
शिक्षकों की भूमिका पर सवाल, परिजनों में गुस्सा
जब सातों बच्चों के शव शनिवार सुबह परिजनों को सौंपे गए, तो झालावाड़ के एसआरजी अस्पताल परिसर मातम का केंद्र बन गया। एक मां ने सवाल उठाते हुए कहा:
मास्टर साहब खुद तो बाहर चले गए और बच्चों को अंदर छोड़ दिया। आखिर वे बाहर क्या कर रहे थे
इस बयान ने शिक्षकों की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर गहरा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।
एक साथ जली पांच चिताएं, गांव में मातम
सरकार की कार्रवाई: 10 लाख मुआवजा और 5 कर्मचारी निलंबित
राज्य सरकार ने मृत बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। वहीं, स्कूल के 5 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है और घटना की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
जिलाधिकारी अजय सिंह ने पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा:
जांच समिति गठित कर दी गई है। जरूरत पड़ने पर FIR भी दर्ज की जाएगी और दोषी पाए जाने पर निष्कासन से भी पीछे नहीं हटेंगे।
राजस्थान में स्कूल भवनों की खस्ता हालत बनी बड़ी चुनौती
यह हादसा केवल एक इमारत का गिरना नहीं, बल्कि राजस्थान के सरकारी स्कूल भवनों की दशा-दुर्दशा की गंभीर चेतावनी है।
पिछले ही साल सरकार ने भवन मरम्मत के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये मंजूर किए थे, लेकिन ज़मीनी हकीकत सामने आ चुकी है—भ्रष्टाचार, लापरवाही और ढुलमुल निगरानी।
📰 समापन पंक्तियाँ: प्रशासन को अब जागना होगा
इस हादसे ने सिर्फ एक गांव की खुशियां नहीं छीनीं, बल्कि पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं। जब तक नियंत्रण, निगरानी और जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक 'स्कूल' नामक संस्था पर से जनता का भरोसा टूटता ही जाएगा।
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