यह यात्रा, जोकि 42 किलोमीटर लांजी से दूर, घने जंगलों व प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण घाटियों से गुजरती है, श्रद्धालुओं की आस्था की गहराइयों को प्रकट करती है। भोलेनाथ को चहेली का पवित्र जल अर्पित कर मनोकामनाओं की पूर्ति की अभिलाषा लिए कांवड़िये इस यात्रा में सम्मिलित होते हैं। इस आध्यात्मिक यात्रा में समर्पित जनसमूह भी सेवा में पीछे नहीं रहता।
सेवा संघ द्वारा आयोजित इस विशेष आयोजन में कांवड़ियों के लिए उत्तम गुणवत्ता का भोजन और ताजे फल वितरित किए गए। शिवभक्तों की हर जरूरत का संवेदनशीलता से ख्याल रखा गया। आयोजन की विशिष्टता यह रही कि स्वयं अशोक कुमार शुक्ला ने स्थानीय शिवालय में पूजन-अर्चन कर देश और राज्य के कल्याण हेतु प्रार्थना की तथा प्रसाद वितरण कर भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया।
शुक्ला जी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि, "शिवभक्तों की सेवा, मानवता की सच्ची साधना है। पुण्य का यह कार्य हमें आत्मिक तृप्ति देता है। यह आयोजन हमारे सामूहिक समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है जो हर वर्ष की भांति इस बार भी निरंतरता के साथ संपन्न हुआ।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सेवा-प्रवाह भविष्य में भी अविरल रहेगा।
ज्ञात हो कि अशोक कुमार शुक्ला वर्षों से निस्वार्थ भाव से शिवभक्तों की सेवा में निरंतर लगे हुए हैं। उनका मानना है कि आत्मा की पूर्ण शांति केवल सेवा से प्राप्त होती है। यही कारण है कि वे नियमित रूप से भंडारे और सेवा आयोजनों का आयोजन करते आ रहे हैं।
इस पावन अवसर पर शुक्ला जी के साथ श्रद्धालुजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें दुलीचंद राउत, विश्वनाथ गुप्ता, हिमांशु गुप्ता, ज्योति गुप्ता, कौशल तिवारी, अरविंद सिंह, सागर सिंह बैस, आशीष निषाद सहित अनेक ग्रामवासी सम्मिलित रहे।
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