जलपरी झील का नया आकर्षण: बत्तखों का मुक्त विचरण, पर्यावरण की अनोखी सैरगाह बनी जबलपुर की यह पुरानी झील

जबलपुर, 29 जनवरी 2026। शहर की हलचल से दूर, रामपुर परिसर में फैली 55 साल पुरानी जलपरी झील अब एक जीवंत पर्यावरणीय स्वर्ग बन रही है। 19,936 वर्ग मीटर में फैली इस झील को और अधिक मनमोहक बनाने के लिए मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने एक अनोखी पहल की है – 12 बत्तखों को यहां मुक्त विचरण के लिए छोड़ा गया है। अब सुबह की सैर करने वाले लोग न सिर्फ झील की शांति का आनंद लेंगे, बल्कि इन बत्तखों को पानी में तैरते और खेलते देखकर एक नई ताजगी महसूस करेंगे। यह कदम न केवल झील की सुंदरता बढ़ा रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मिसाल पेश कर रहा है।


कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने हाल ही में इन बत्तखों – सात नर और पांच मादा – को झील में छोड़ा। जलपरी, जो शहर की चुनिंदा सैरगाहों में से एक है, अब इन पंखदार मेहमानों से और भी जीवंत हो गई है। दिन भर ये बत्तखें झील में स्वतंत्र रूप से घूमेंगी, छोटे कीड़ों, मछलियों और वनस्पतियों को अपना भोजन बनाएंगी। शाम ढलते ही इन्हें सुरक्षा के लिए विशेष पिंजरों में वापस लाया जाएगा। कंपनी के सिविल प्रोजेक्ट ऑफिस को इनकी देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जहां दो समर्पित कर्मचारी रोजाना उनकी निगरानी करेंगे। पिंजरों में गेहूं, धान, चावल और लाई जैसे पौष्टिक भोजन का इंतजाम किया गया है, ताकि ये स्वस्थ और खुश रहें।

यह पहल जलपरी को पर्यावरणीय रूप से मजबूत बनाने की बड़ी योजना का हिस्सा है। कंपनी के सिविल प्रोजेक्ट विभाग ने गर्मियों में झील के सूखने की पुरानी समस्या को हमेशा के लिए हल कर दिया है। एक पुराने बंद कुएं को रिचार्ज करके दुरुस्त किया गया, और चार इंच के पाइप से अप्रैल से जून तक रोजाना चार घंटे पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाती है। नतीजा? अब झील में पानी का स्तर हमेशा बना रहता है, प्रवासी पक्षी यहां आश्रय पाते हैं, और मछलियां फल-फूल रही हैं। यह छोटा-सा प्रयास पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में बड़ा योगदान दे रहा है।

जलपरी की कहानी भी कम रोचक नहीं है। 1960 में विद्युत मंडल मुख्यालय के निर्माण के दौरान बनी यह प्राकृतिक झील, एक ब्रिज और जलपरी की मूर्ति से सजी हुई है। ऊपर की पहाड़ी पर स्थित ठाकुरताल का अतिरिक्त पानी यहां बहकर आता है, साथ ही आसपास के इलाकों और सड़कों से वर्षा जल भी एकत्रित होता है। कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी के तहत यह झील अब शहरवासियों के लिए एक रमणीय स्थल बन चुकी है, जहां प्रकृति और मानव प्रयासों का अनोखा मेल देखने को मिलता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बत्तखों की मौजूदगी से झील और अधिक आकर्षक हो गई है। एक नियमित सैर करने वाले ने बताया, "पहले सिर्फ पानी और हरियाली थी, अब ये बत्तखें जैसे झील को जीवंत कर रही हैं। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजेदार कदम है।" कंपनी के अधिकारी भी उत्साहित हैं और कहते हैं कि ऐसे प्रयास जारी रहेंगे, ताकि जलपरी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा उपहार बनी रहे।

Post a Comment

और नया पुराने