कार्यक्रम में इतिहासविद् श्रीमती संध्या श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा –
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग के महत्व को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया था, जिसके बाद 21 जून को प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।”
मुख्य अतिथि विभव माहेश्वरी ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा –
“आज के ही दिन भगवान शिव ने सप्तऋषियों को योग की शिक्षा देना प्रारंभ किया था। योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना से जुड़ने का माध्यम है।”
विशिष्ट अतिथि डॉ. सोनम गुप्ता (प्राचार्य, चरक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) ने योग को जीवनशैली में नियमित रूप से अपनाने की अपील करते हुए कहा –
“योग केवल बीमारियों से बचाव नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन की कुंजी है।”
कार्यक्रम अध्यक्ष नवनीत माहेश्वरी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा –
“योग का शाब्दिक अर्थ है 'जोड़ना' – आत्मा को परमात्मा से, शरीर को चेतना से। आज के आधुनिक युग में जब तनाव, अवसाद और अनियमित जीवनशैली आम हो गई है, तब योग ही ऐसा साधन है जिसे आत्मसात कर हम शारीरिक, मानसिक और आत्मिक संतुलन प्राप्त कर सकते हैं।”
कार्यक्रम का संयोजन श्री तरुण मिश्रा ने किया तथा आभार प्रदर्शन योगेश सराफ द्वारा किया गया। इस अवसर पर कॉलेज परिवार से श्रीमती उमा शिवहरे, डॉ. वर्षा तिवारी, रेणुका पाठक, संध्या श्रीवास्तव, आरती शर्मा, अनुराधा विश्वकर्मा, शैलेंद्र परोहा, किरण रैकवार, जी.एन. पांडे सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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