उत्तर प्रदेश: पुलिस सेवा से क्यों हट रहे हैं युवा? 3668 सिपाहियों ने छोड़ी नौकरी, वजहें चौंकाने वाली

लखनऊ, 30 जुलाई 2025।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुलिस बल को मजबूत करने के लिए शुरू की गई ऐतिहासिक भर्ती प्रक्रिया उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई जब हाल ही में भर्ती हुए 3668 सिपाहियों ने या तो ट्रेनिंग शुरू होने से पहले ही नौकरी नहीं जॉइन की या फिर प्रारंभिक चरण में इस्तीफा दे दिया।


यह सब उस समय हुआ जब 15 जून 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में एक भव्य समारोह के दौरान 60,244 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे। लेकिन 21 जून से ट्रेनिंग शुरू होते ही सामने आया कि हजारों युवाओं ने पुलिस की नौकरी को अलविदा कह दिया।


🚨 क्यों छोड़ी गई सिपाही की नौकरी?

इन सिपाहियों के नौकरी छोड़ने के पीछे जो मुख्य कारण सामने आए हैं, वे इस प्रकार हैं:

  • पुलिस थानों की बदहाल स्थिति – बुनियादी सुविधाओं का अभाव

  • 24 घंटे का अनुशासन और कोई निश्चित समय नहीं

  • कम वेतन और ज़्यादा कार्यभार

  • परिवार व व्यक्तिगत जीवन के लिए समय की कमी

एक नौकरी छोड़ने वाले अभ्यर्थी ने कहा,

मैं चाहूंगा कि किसी विभाग में बाबू बनूं, जहां शाम को घर जाकर परिवार के साथ समय बिता सकूं।

📉 इतनी मेहनत के बाद फिर क्यों छोड़ी नौकरी?

गौरतलब है कि इस पुलिस भर्ती परीक्षा में करीब 50 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 48,195 पुरुष और 12,049 महिला अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। इतनी प्रतिस्पर्धा में चयन के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में इस्तीफा देना सिस्टम पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।


🗣️ पूर्व DGP जावीद अहमद का विश्लेषण

पूर्व पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद के अनुसार,

यह नई पीढ़ी की सोच है। आज का युवा सीमित समय और संतुलित जीवन चाहता है। पुलिस सेवा में त्याग और कठिन अनुशासन होता है, जिसे निभाना सबके बस की बात नहीं। 

उन्होंने बताया कि कई थानों में बैठने की उचित व्यवस्था, साफ-सफाई, और सुविधा का घोर अभाव है। कई युवाओं ने ट्रेनिंग के दौरान ही समझ लिया कि पुलिस की नौकरी उनके अनुकूल नहीं है।


🧾 क्या है सरकार की प्रतिक्रिया?

सरकार या मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। जबकि भर्ती को सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया था।

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