बिहार में डिजिटल मज़ाक या साइबर अपराध? नवादा में 'डॉगेश बाबू' ने मांगा निवास प्रमाण पत्र

नवादा (बिहार), 30 जुलाई 2025।
बिहार में सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। नवादा जिले में एक अनोखा और हास्यास्पद मामला सामने आया है, जहां ‘डॉगेश बाबू’ नामक एक कुत्ते के नाम पर निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया गया है। यह मामला पहले से ही विवादों में रहे ‘डॉग बाबू’ और ‘सोनालिका ट्रैक्टर’ जैसे नामों से किए गए फर्जी आवेदनों की कड़ी में ताजा उदाहरण है।



📸 आईएएस रवि प्रकाश ने किया खुलासा

नवादा के जिलाधिकारी रवि प्रकाश, जो 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, ने इस मामले को स्वयं सोशल मीडिया (एक्स) पर उजागर किया। उन्होंने 'डॉगेश बाबू' के नाम से आए आवेदन का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा:

कॉपी कैट... या कहें कि 'कॉपी डॉग'! सिरदला, रजौली से निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने की कोशिश की, लेकिन पकड़ में आ गए। इस घटिया और घिसी-पिटी हरकत के लिए प्राथमिकी दर्ज की जा रही है...

🐶 आवेदन में कुत्ते की फोटो और अजीब जानकारियां


इस फर्जी आवेदन में एक कुत्ते की तस्वीर लगाई गई है, जिसमें अभिभावकों के नाम ‘डॉगेश के पापा’ और ‘डॉगेश की मम्मी’ दर्ज हैं। यह कदम न सिर्फ सरकारी प्रणाली की खिल्ली उड़ाने जैसा है बल्कि साइबर अपराध की श्रेणी में भी आता है।


🧑‍💻 “बिहार का जामताड़ा” बनता नवादा?

नवादा जिला झारखंड की सीमा से सटा हुआ है और इसे "बिहार का जामताड़ा" कहा जाने लगा है, क्योंकि यहां से साइबर फ्रॉड के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बीते एक सप्ताह में यह तीसरा मामला है जहां फर्जी नामों से निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दिया गया:

  • मसौढ़ी में 'डॉग बाबू'

  • पूर्वी चंपारण में 'सोनालिका ट्रैक्टर' (भोजपुरी अभिनेत्री की तस्वीर के साथ)

  • अब नवादा में 'डॉगेश बाबू'


🗂️ मतदाता पुनरीक्षण अभियान और आवेदनों में तेजी

विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के चलते निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदनों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त 11 वैध दस्तावेजों में निवास प्रमाण पत्र भी शामिल है, जिससे कुछ तत्व सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे हैं।


⚖️ सख्त कार्रवाई की तैयारी

प्रशासन ने सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कर दी है, और साइबर विशेषज्ञों की मदद से फर्जी आवेदकों की पहचान की जा रही है। जिलाधिकारी ने यह साफ किया कि प्रशासन अब ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगा

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