⚠️ बच्चों की चेतावनी को किया गया नजरअंदाज
हादसे से पहले छात्रों ने शिक्षकों को छत से गिरते कंकड़ों और चूने की जानकारी दी थी। लेकिन बताया जा रहा है कि शिक्षक उस वक्त बाहर नाश्ता कर रहे थे और बच्चों को डांटते हुए वापस कक्षा में बैठा दिया। कुछ ही मिनटों बाद वही छत बच्चों पर कहर बनकर टूटी और मासूमों की जान ले गई।
🧒 मृतकों में ये मासूम शामिल
इस हादसे में जिन 8 बच्चों की जान गई, उनमें शामिल हैं:
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पायल (14 वर्ष)
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प्रियंका (14 वर्ष)
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हरीश (8 वर्ष)
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सोना भाई (5 वर्ष)
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मिथुन (11 वर्ष)
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कार्तिक (18 वर्ष)
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मीना (8 वर्ष)
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एक अज्ञात बच्चा
घायलों को झालावाड़ के SRG अस्पताल और अन्य चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है।
🏫 35 साल पुरानी जर्जर इमारत, कई बार दी गई थी शिकायत
स्थानीय निवासियों और अभिभावकों के अनुसार, स्कूल भवन की हालत वर्षों से जर्जर थी। दीवारों में दरारें थीं और बारिश में छत से पानी टपकता था। कई बार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
स्थानीय ग्रामीण बालकिशन ने कहा:
यदि समय रहते प्रशासन ने ध्यान दिया होता, तो आज हमारे बच्चे जिंदा होते।
❌ 10 शिक्षक-अधिकारी निलंबित, जांच के आदेश
राज्य सरकार ने हादसे के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में स्कूल की हेडमास्टर मीना गर्ग, शिक्षक जावेद अहमद, रामविलास लवंशी, कन्हैयालाल सुमन, बद्रीलाल लोधा सहित जिला शिक्षा अधिकारी नरसो मीणा भी शामिल हैं।
🗣️ सरकार, नेताओं और परिजनों की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर गहरा शोक जताया और कहा:
यह हादसा बेहद दुखद है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाने की घोषणा की। साथ ही उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जानकारी दी कि राज्य में जर्जर स्कूल भवनों के सुधार के लिए ₹200 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी हादसे पर दुख जताया और प्रशासन से राहत कार्य में तेजी लाने की मांग की।
🛑 गांव में विरोध और सड़क जाम
हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने मनोहरथाना-अकलेरा रोड को जाम कर दिया और मुख्यमंत्री के मौके पर आने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
🛠️ बचाव कार्य में स्थानीय लोग भी जुटे
हादसे के तुरंत बाद ग्रामीण, शिक्षक और अभिभावक मौके पर पहुंचे और मलबा हटाकर बच्चों को निकालने लगे। कुछ ही समय में पुलिस, NDRF और आपदा राहत दल मौके पर पहुंचे। JCB मशीनों से मलबा हटाया गया और सभी बच्चों को निकाला गया।
📉 राजस्थान में हजारों जर्जर स्कूल भवन, शिक्षा विभाग की निष्क्रियता उजागर
UDISE+ की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में हजारों स्कूल भवनों की स्थिति खराब है। शिक्षा विभाग ने जून 2025 में ही सभी स्कूलों को मानसून पूर्व मरम्मत के निर्देश दिए थे, लेकिन पिपलोदी स्कूल में कोई कार्यवाही नहीं हुई। यह हादसा उस लापरवाह रवैये का नतीजा है, जिसकी कीमत मासूमों को जान देकर चुकानी पड़ी।
📢 अक्षर सत्ता की अपील
यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता की बानगी है। 'अक्षर सत्ता' सरकार से मांग करता है कि सभी जर्जर स्कूलों का तत्काल निरीक्षण हो, जिम्मेदारों पर FIR दर्ज की जाए और मृतक परिवारों को ₹50 लाख तक का मुआवजा दिया जाए।
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