नई दिल्ली, 25 जुलाई 2025।
भारत के संवैधानिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। चुनाव आयोग ने वर्ष 2025 में होने वाले उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनावी प्रक्रिया का श्रीगणेश कर दिया है। इस गंभीर संवैधानिक जिम्मेदारी के निर्वहन हेतु राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया है। यह कदम भारतीय संविधान की धाराओं तथा 1974 में पारित राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव संबंधी नियमावली के अंतर्गत उठाया गया है।
संवैधानिक परंपरा का निरंतर निर्वाह
हर पांच वर्ष में होने वाले इस चुनाव में, परंपरागत रूप से लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को बारी-बारी से यह भूमिका सौंपी जाती है। पिछले उपचुनाव में यह दायित्व लोकसभा महासचिव के हिस्से आया था, अतः इस बार यह जिम्मेदारी राज्यसभा सचिवालय को सौंपी गई। इस निर्णय से पूर्व कानून एवं न्याय मंत्रालय से विधिक परामर्श प्राप्त किया गया और राज्यसभा के उपसभापति की औपचारिक सहमति भी ली गई।
प्रशासनिक सहायता के लिए दो वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त
चुनावी प्रक्रिया के निष्कलंक संचालन हेतु गरिमा जैन (संयुक्त सचिव) एवं विजय कुमार (निदेशक) को सहायक रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। संबंधित अधिसूचना शुक्रवार को जारी की जाएगी। यह दोनों अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शिता और विधिसम्मत रूप से संपन्न हो।
विपक्षी गठबंधन की रणनीति: साझा उम्मीदवार की पेशकश पर विमर्श
विपक्षी खेमे में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। इंडिया गठबंधन इस संवैधानिक लड़ाई में एक साझा प्रत्याशी को मैदान में उतारने की योजना पर विचार-विमर्श कर रहा है। यद्यपि जीत की संभावनाएं कम प्रतीत होती हैं, फिर भी राजनीतिक संदेश देने हेतु यह एक ठोस कदम माना जा रहा है। गठबंधन के एक प्रमुख नेता ने पीटीआई को बताया कि "यह चुनाव महज़ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि विपक्ष की संगठित शक्ति का प्रतीक बन सकता है।"
पद रिक्त, मुकाबला गहन: विजेता के लिए 392 मत आवश्यक
हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से त्यागपत्र दे दिया। उनके इस्तीफे के कारणों पर राजनीतिक पटल पर अटकलें भी तेज़ हो चुकी हैं, जो अभी तक पर्दे के पीछे छिपी हुई हैं।
संविधान के तहत, उपराष्ट्रपति का चुनाव सांसदों द्वारा किया जाता है, जिसमें लोकसभा एवं राज्यसभा—दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं। इस समय संसद की कुल संयुक्त सदस्य संख्या 782 है। पूर्ण मतदान की स्थिति में उम्मीदवार को न्यूनतम 392 मतों की आवश्यकता होगी।
राजनीतिक गणित: एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन की ताकत का विश्लेषण
लोकसभा में जहां एनडीए को 293 सांसदों का समर्थन प्राप्त है, वहीं इंडिया गठबंधन के पास 234 सांसदों की ताकत है। राज्यसभा की बात करें तो वहां एनडीए के पास तकरीबन 130 सदस्य हैं और इंडिया गुट को 79 सांसदों का संबल प्राप्त है। उपराष्ट्रपति चुनाव एक समग्र शक्ति परीक्षण बनकर उभरता दिख रहा है।
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