खनिज अधिकारी आर.के. खातरकर तत्काल प्रभाव से निलंबित, ई-खनिज पोर्टल संचालन में मनमानी पड़ी भारी

कलेक्टर मृणाल मीणा की अनुशंसा पर कार्रवाई, मुख्यालय जबलपुर स्थानांतरित

📍 बालाघाट, 18 जुलाई 2025 | अक्षर सत्ता

बालाघाट जिले में खनिज विभाग के प्रभारी अधिकारी आर.के. खातरकर को कर्तव्यों में लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और नियमों की अवहेलना के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर मृणाल मीणा की अनुशंसा पर राज्य शासन द्वारा की गई है।


⚖️ ई-खनिज पोर्टल में मनमानी: न नियमों की चिंता, न अनुमति की परवाह

खनिज अधिकारी खातरकर पर आरोप है कि उन्होंने कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना ई-खनिज पोर्टल को अपने स्तर पर बंद (सस्पेंड) और पुनः चालू किया।
विशेष रूप से उन्होंने हीरा पावर एंड स्टील लिमिटेड, रायपुर के अंतर्गत आने वाली जगनटोला मैंगनीज खदान के ई-पोर्टल को 31 दिसंबर 2024 को अनुचित रूप से निलंबित किया था।

हालांकि, 19 मार्च 2025 को डीजीएमएस (DGMS) की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्यवाही पूरी कर जिला खनिज कार्यालय को जानकारी सौंप दी गई थी, इसके बावजूद खातरकर ने पोर्टल को तत्काल पुनः शुरू नहीं किया।
बल्कि, उन्होंने अपनी मनमर्जी से 15 मई 2025 को ही पोर्टल को दोबारा एक्टिव किया, जिससे खनन कार्यों और खनिज प्रबंधन प्रणाली में अनावश्यक व्यवधान उत्पन्न हुआ।


🔍 निलंबन आदेश में क्या है खास?

राज्य शासन द्वारा जारी आदेशानुसार:

  • आर.के. खातरकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

  • निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जबलपुर स्थित भौमिकी एवं खनिकर्म संचालनालय के क्षेत्रीय कार्यालय में नियत किया गया है।

  • उनके विरुद्ध आगे की अनुशासनात्मक कार्यवाही नियमानुसार जारी रहेगी।


🧾 कार्रवाई का संदेश: शासकीय पदों पर मनमानी नहीं सहन होगी

कलेक्टर मृणाल मीणा की सक्रिय अनुशंसा और शासन की त्वरित प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि शासन प्रशासन ई-गवर्नेंस के संसाधनों के दुरुपयोग को गंभीरता से ले रहा है।
इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि खनिज विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पारदर्शिता, नियमबद्ध कार्यप्रणाली और जवाबदेही सर्वोपरि है।


🔎 प्रभाव और पृष्ठभूमि: क्यों थी यह कार्रवाई जरूरी?

खनिज विभाग की कार्यशैली का सीधा असर खनन कंपनियों, श्रमिकों, और राजस्व पर पड़ता है। यदि अधिकारी ई-खनिज पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को बिना अनुमति बंद या शुरू करते हैं, तो इससे खनन कार्य ठप हो सकते हैं, जिससे:

  • राज्य को राजस्व की हानि

  • कंपनियों को आर्थिक नुकसान

  • स्थानीय श्रमिकों की आजीविका प्रभावित होती है।


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✍️ संपादक: दयाल चंद यादव (MCJ)

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