शिकायतकर्ता ने लगाए संगीन आरोप
वार्ड क्रमांक 3 के निवासी विजय कुमार मिश्रा ने आरोप लगाया है कि इस रजिस्ट्री में कोमिन आमाडारे, भूनेश्वरी बेदरे, सेवा प्रदाता चंद्रकांत किरनापुरे और गवाह नसीमुद्दीन खान की मिलीभगत से दस्तावेजों की कूट रचना कर ईडी और राज्य शासन के प्रतिबंधात्मक आदेशों की अवहेलना की गई है। मिश्रा का कहना है कि हल्का नंबर 19/60, खसरा नंबर 27/23 की 0.024 हेक्टेयर (240 वर्गमीटर) भूमि पर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करवाई गई।
पटवारी की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले में पटवारी इंद्रपाल मड़ावी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। शिकायतकर्ता के अनुसार, पटवारी द्वारा जारी नक्शे में खुद ही उस जमीन को बिक्रीशुदा बताया गया, जिससे संदेह और गहरा हो गया है कि पूरे प्रकरण में राजस्व अधिकारियों की भी संलिप्तता हो सकती है।
उपपंजीयक ने झाड़ा पल्ला, स्थल निरीक्षण का दावा
जब मामले में उपपंजीयक लांजी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह रजिस्ट्री उनके कार्यकाल में नहीं हुई है। उन्होंने हाल ही में (जून माह में) पदभार संभाला है और पूर्व उपपंजीयक के कार्यकाल में ही यह रजिस्ट्री की गई थी। हालांकि उन्होंने दावा किया कि उन्होंने मौके का निरीक्षण किया है और जांच रिपोर्ट शीघ्र ही वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी जाएगी।
तहसीलदार ने फिर टाली जांच, जांच दल नहीं भेजा गया
उल्लेखनीय है कि एसडीएम ने तहसीलदार को सात दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तहसीलदार हिम्मत सिंह भवेदी की ओर से अभी तक कोई जांच दल मौके पर नहीं भेजा गया। इस संबंध में पूछे जाने पर तहसीलदार ने आरआई भूपेंद्र अहिरवार की तबीयत खराब होने और पटवारी के बदले जाने का हवाला देते हुए देरी का कारण बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही विवादित भूमि का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
जनता में आक्रोश, प्रशासन की निष्क्रियता से गहरी निराशा
फर्जीवाड़े के इस गंभीर मामले में प्रशासन की लापरवाही और ढुलमुल रवैया जनता के बीच असंतोष फैला रहा है। लोगों का कहना है कि यदि इस मामले में शीघ्र और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो भविष्य में और भी ऐसे फर्जीवाड़े को बढ़ावा मिलेगा। प्रशासन को चाहिए कि वह समयबद्ध कार्रवाई कर दोषियों को सजा दिलाए।
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