न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में उजागर किए गए आंकड़े बहुत परेशान करने वाले और चिंताजनक हैं। अदालत ने इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया है।
🟠 क्या है मामला?
दिल्ली में एक पागल आवारा कुत्ते ने मासूम बच्ची पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राजधानी समेत देशभर में हर दिन सैकड़ों लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। इससे रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी तेजी से फैल रही है, विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में।
🧾 सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा:
खबर में प्रस्तुत आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। इंसानों की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। यदि शहर की गलियों और सड़कों को इन जानवरों के लिए खुला छोड़ दिया गया, तो आमजन का जीवन संकट में आ जाएगा।
अदालत ने निर्देश दिया कि यह समाचार रिपोर्ट भारत के प्रधान न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत की जाए ताकि इस पर उचित आदेश पारित किया जा सके।
🐕 आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर भी सवाल
कोर्ट ने हाल ही में नोएडा में आवारा कुत्तों को खाना देने पर परेशान किए जाने की शिकायत करने वाले एक याचिकाकर्ता से भी सख्त सवाल किए थे। पीठ ने पूछा:
आप उन्हें अपने घर में क्यों नहीं खिलाते? क्या हर गली और सड़क को इनके लिए खुला छोड़ दें? इंसानों के लिए कोई जगह नहीं रह जाएगी।
यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के मार्च 2025 के उस आदेश से जुड़ा है जिसमें सड़कों पर कुत्तों को खाना देने की अनुमति को लेकर विवाद था।
🔍 अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे:
-
रेबीज के मामलों का डाटा पारदर्शी ढंग से प्रस्तुत करें।
-
पशु जन्म नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन कराएं।
-
शहरी इलाकों में कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के लिए ठोस रणनीति बनाएं।
🌐 वेबसाइट: www.aksharsatta.page
एक टिप्पणी भेजें