⚖️ अदालत की टिप्पणी: अंतरिम राहत संभव नहीं
कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए आदेश में याचिकाकर्ता द्वारा अंतरिम राहत की मांग नहीं की गई थी, इसलिए अब उस आधार पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि अब वह इस मामले में 29 जुलाई 2025 को अंतिम सुनवाई की रूपरेखा तय करेगी।
🧾 याचिका में क्या कहा गया था?
एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि मतदाता सूची को अस्थायी रूप से अंतिम रूप नहीं दिया जाना चाहिए और इसके मसौदा प्रकाशन पर रोक लगनी चाहिए। लेकिन पीठ ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अंतिम सुनवाई के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
🪪 आधार और वोटर ID पर भरोसा कायम
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को यह भी निर्देशित किया कि वह पहले के आदेश का पालन करते हुए आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र को प्रमाणिक दस्तावेजों के रूप में स्वीकार करता रहे। कोर्ट ने कहा:
राशन कार्ड की तुलना में आधार और वोटर आईडी अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय हैं। राशन कार्ड में जालसाज़ी संभव है, लेकिन आधार और वोटर आईडी की वैधता को माना गया है।
🗳️ चुनावी प्रक्रिया पर नहीं पड़ेगा असर
इस फैसले से स्पष्ट है कि आगामी चुनावों के मद्देनज़र मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। निर्वाचन आयोग को मिली संवैधानिक स्वतंत्रता और उसके दिशा-निर्देशों को कोर्ट ने एक बार फिर वैधता प्रदान की है।
🌐 वेबसाइट: www.aksharsatta.page
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