राजस्थान: झालावाड़ के बाद नागौर और सिरोही में भी ढही स्कूल की छतें, बड़ी दुर्घटनाएं टलीं लेकिन प्रशासन पर उठे सवाल

जुलाई 26, 2025 | 

जयपुर। राजस्थान में सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतें अब जानलेवा बनती जा रही हैं। झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में 25 जुलाई को सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत और 28 से अधिक घायल होने की घटना से राज्य में कोहराम मच गया। इस हादसे के ठीक बाद 26 जुलाई को नागौर और सिरोही जिलों में भी दो स्कूलों की छतें ढह गईं, हालांकि स्कूल बंद होने के कारण बड़े हादसे टल गए।

नागौर: सुबह 6:30 बजे गिरी छत, स्कूल था बंद

नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र के खारियावास गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय की छत आज सुबह 6:30 बजे अचानक गिर गई। स्कूल खुलने से पहले ही यह घटना हुई, जिससे सौभाग्यवश कोई जनहानि नहीं हुई। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से दीवारों में दरारें थीं, जिसके चलते स्कूल प्रशासन ने एहतियातन स्कूल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था।

एक चिंतित अभिभावक ने सवाल उठाया, "अगर बच्चे अंदर होते तो कौन जिम्मेदार होता? प्रशासन कब जागेगा?" यह घटना स्कूल भवनों की खस्ताहाल स्थिति को उजागर करती है।

सिरोही: माउंट आबू के गांव में गिरा प्लास्टर

सिरोही जिले के माउंट आबू स्थित पांडुरी गांव के बंजराफली स्कूल में बरामदे की छत का प्लास्टर गिर गया। शुक्र है कि स्कूल उस समय बंद था। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई गंभीर हादसा न हो।


लोगों का आक्रोश और विरोध प्रदर्शन

झालावाड़ हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। कुछ जगहों पर पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ और स्कूल भवनों पर ताले जड़ने की घटनाएं सामने आईं। नागौर और सिरोही की घटनाओं ने भी जनाक्रोश को और भड़का दिया है।

सोशल मीडिया पर भी नाराज़गी ज़ाहिर की जा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता @SupriyaShrinate ने X (पूर्व Twitter) पर लिखा"गरीब होना क्या गुनाह है? दो दिन में दो स्कूलों की छतें गिरना कोई संयोग नहीं, यह लापरवाही की पराकाष्ठा है।"


सियासत तेज, इस्तीफे की मांग

राज्य में इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झालावाड़ के अस्पताल में घायलों से मुलाकात की और प्रशासन की नाकामी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यदि स्कूल भवन को पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया जाता, तो ये जानें बचाई जा सकती थीं।"

कांग्रेस नेता सचिन पायलट और प्रताप सिंह खाचरियावास ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। पायलट ने कहा, "यह घोर प्रशासनिक लापरवाही है। राज्य सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी।"


राजस्थान में 2,000 से अधिक स्कूल जर्जर

राज्य में लगभग 2,000 सरकारी स्कूल जर्जर हालत में हैं, जिनमें से अधिकांश वर्षों से मरम्मत के इंतजार में हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में 325 करोड़ और 2024-25 में 250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, पर ज़मीनी स्तर पर इनका कार्यान्वयन बेहद धीमा रहा।

राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की है, साथ ही राज्य सरकार से सभी स्कूल भवनों की तुरंत समीक्षा करने को कहा है।

📌 कब जागेगा सिस्टम?

एक के बाद एक तीन जिलों में स्कूल की छतें गिरना महज़ एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी विफलता है। बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को तुरंत कार्रवाई करनी होगी, नहीं तो अगला हादसा और भी भयावह हो सकता है।

📢 अक्षर सत्तानिर्भीक, निष्पक्ष और गूढ़ विश्लेषण की पत्रकारिता का प्रामाणिक मंच
हम आपके विश्वास और सच्चाई की आवाज़ हैं।

📞 समाचार, विज्ञापन या कवरेज हेतु संपर्क करें: 9424755191
✍️ संपादक: दयाल चंद यादव (MCJ)
🌐 वेबसाइट: www.aksharsatta.page

Post a Comment

और नया पुराने