वारासिवनी (बालाघाट), 28 जुलाई 2025 — आदिवासी समाज से ताल्लुक रखने वाले ईश्वर टेकाम ने अपनी पुश्तैनी भूमि से साजिशन बेदखल किए जाने और पुत्र की संदिग्ध मौत को लेकर न्याय की मांग करते हुए मध्यप्रदेश शासन के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री तथा बालाघाट जिले के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह को 5 बिंदुओं वाला ज्ञापन सौंपा है। पीड़ित परिवार ने इस पूरे मामले में गहरी साजिश और भूमाफियाओं की भूमिका का आरोप लगाया है।
1983 से कब्जे में थी भूमि, अचानक हुआ नामांतरण
ईश्वर टेकाम का कहना है कि मदनपुर रोड, शिवधाम मोहल्ला स्थित उनकी 10.73 एकड़ भूमि 1983 में हुए बंटवारे के तहत उनकी पत्नी यमुना बाई के नाम दर्ज हुई थी। 2022 में पत्नी की मृत्यु के बाद यह जमीन उनके नाम और पुत्रों – महेंद्र, देवेंद्र और गोविंद के नाम हो गई थी। लेकिन 2023 में अचानक कुछ अज्ञात व्यक्तियों को यमुना बाई के पूर्वजों के वंशज बताकर एसडीएम कोर्ट में बंटवारे को चुनौती दिलवाई गई।
एसडीएम कोर्ट ने पुराने बंटवारे को खारिज कर मामले को तहसील कोर्ट भेजा। तहसीलदार द्वारा 13 जून 2025 को टेकाम परिवार का नाम हटाकर वरकड़े परिवार का नाम दर्ज कर दिया गया, जबकि तहसीलदार इमरान मंसूरी का स्थानांतरण 10 जून को ही हो चुका था। इसके अगले ही दिन यानी 14 जून को नामांतरण और 17 जून को भूमि रजिस्ट्री तक कर दी गई।
भूमाफियाओं की साजिश में हुई पुत्र की मौत?
ईश्वर टेकाम ने ज्ञापन में दावा किया कि नवंबर 2024 में उनके बड़े बेटे महेंद्र टेकाम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। महेंद्र को पहले खैरलांजी में बंदी बनाकर रखा गया, जहां उसे शराब के जरिए मानसिक रूप से तोड़ा गया। कुछ महीने बाद वह मृत अवस्था में बालाघाट अस्पताल लाया गया। टेकाम का आरोप है कि यह पूरी घटना उनकी जमीन से जुड़ी है और भूमाफियाओं द्वारा सुनियोजित हत्या का हिस्सा हो सकती है।
कलेक्टर और पुलिस को सौंप चुके हैं शिकायतें
पीड़ित टेकाम परिवार ने पहले भी बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा को लिखित शिकायत देकर न्याय की मांग की थी। साथ ही स्थानीय पुलिस थाना में भी हमलों और धमकियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। टेकाम का कहना है कि भूमाफियाओं ने उनके समर्थकों पर किराए के गुंडों से हमला करवाया और उन्हें डरा-धमका कर जमीन से बेदखल करवा दिया।
जमीन हड़पने का चल रहा है सुनियोजित खेल
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूरे बालाघाट जिले में आदिवासियों की भूमि को अफरा-तफरी में बेचने का सिलसिला चल रहा है। एक ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत खापा का है, जहां जबलपुर निवासी एक आदिवासी महिला की जमीन जाली दस्तावेजों के आधार पर बेच दी गई। पुलिस ने इस मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
ईश्वर टेकाम ने प्रभारी मंत्री से निवेदन किया है कि उनके मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाए, भूमाफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और उनकी पुश्तैनी जमीन उन्हें वापस दिलाई जाए। उन्होंने आशंका जताई है कि उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी जा रही है और उन्होंने सुरक्षा की मांग भी की है।
एक टिप्पणी भेजें