जिलाध्यक्ष सजल मस्की ने वन विभाग सहित कई विभागों की उदासीनता पर जताई कड़ी नाराज़गी
मध्यप्रदेश कर्मचारी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सजल मस्की ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए वन विभाग सहित कई विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिले के अधिकांश विभागों में वर्षों से परामर्शदात्री समिति की बैठक नहीं हुई है, जिससे कर्मचारियों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
कर्मचारियों के अधिकार की अनदेखी
सजल मस्की ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि परामर्शदात्री समिति की बैठक कर्मचारियों का संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकार है। इस बैठक के माध्यम से कर्मचारी अपनी समस्याएं विभागीय अधिकारियों के समक्ष रख सकते हैं, किंतु बैठकें नहीं होने के कारण उनकी आवाज दब रही है।
वन विभाग में 5 वर्षों से नहीं हुई बैठक
उन्होंने बताया कि वन विभाग में पिछले 5 वर्षों से परामर्शदात्री समिति की कोई बैठक आयोजित नहीं की गई, जिससे वहाँ कार्यरत स्थायी कर्मी सातवें वेतनमान और न्यूनतम वेतनमान जैसी सुविधाओं से वंचित हैं। वन सुरक्षा श्रमिकों के मानदेय में भी कटौती की जा रही है, जिससे उनके जीवन यापन में कठिनाई हो रही है।
वेतन अनुमोदन और महंगाई भत्ता भी लंबित
सजल मस्की ने यह भी कहा कि कई कर्मचारियों के वेतनमान अनुमोदन लंबित हैं, जिससे उन्हें महंगाई भत्ता समेत अन्य वैधानिक लाभ नहीं मिल पा रहे। इससे कर्मचारियों में भारी नाराज़गी और असंतोष व्याप्त है।
कलेक्टर के निर्देशों की भी अनदेखी
बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा द्वारा भी सभी विभागों को परामर्शदात्री बैठकें आयोजित करने और शासन से मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों की सूची भेजने के निर्देश जारी किए गए थे। बावजूद इसके, कई विभाग इन आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे कर्मचारियों की समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।
कर्मचारियों की चेतावनी
मध्यप्रदेश कर्मचारी कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही परामर्शदात्री बैठकें आयोजित नहीं की गईं और कर्मचारियों की समस्याओं का हल नहीं निकाला गया, तो संगठन आंदोलनात्मक रणनीति अपनाने के लिए विवश होगा।
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