🗓️ नई दिल्ली, 15 जुलाई 2025 |
यमन की जेल में हत्या के आरोप में बंद भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को लेकर एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। भारत सरकार के राजनयिक प्रयासों के चलते निमिषा को 16 जुलाई को दी जाने वाली मौत की सज़ा फिलहाल टाल दी गई है। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को दी।
🇮🇳 सरकार के लगातार प्रयासों से मिली अस्थायी राहत
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार की ओर से किए जा रहे राजनयिक संवाद, कानूनी सहयोग और मानवीय अपीलों का असर यमन के अधिकारियों पर पड़ा है। सरकार की ओर से निमिषा प्रिया के परिजनों और यमन की कानूनी व्यवस्था के बीच सहमति का रास्ता निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए।
भारतीय अधिकारियों ने स्थानीय जेल प्रशासन और अभियोजन कार्यालय के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा, जिसके चलते फांसी की सजा पर स्थगन का आदेश मिल सका।
⚖️ खूंबहा के तहत 8.5 करोड़ रुपये देने की पेशकश
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, निमिषा के कानूनी सलाहकारों ने ‘खूंबहा’ यानी क्षतिपूर्ति के तौर पर मृतक पक्ष को करीब 8.5 करोड़ रुपये (10 लाख डॉलर) की पेशकश की है। यमन की परंपरा में खूंबहा के जरिए सजा को रोका या माफ किया जा सकता है।
गौरतलब है कि यमन की राजधानी सना पर हूती विद्रोहियों का नियंत्रण है, जिससे इस मामले को राजनयिक और मानवीय दृष्टिकोण से और भी जटिल बना देता है।
👩⚕️ कौन हैं निमिषा प्रिया?
केरल के पलक्कड़ ज़िले की रहने वाली 37 वर्षीय निमिषा प्रिया, वर्ष 2011 में नर्सिंग प्रशिक्षण के बाद यमन गई थीं। 2017 में उन्हें अपने व्यापारिक सहयोगी तलाल अब्दो महदी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2020 में यमन की अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार ने दी जानकारी
इस मामले को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां केंद्र सरकार ने बताया कि यमन से एक अनौपचारिक संदेश मिला है कि फांसी टाल दी जाएगी, लेकिन इसकी कोई ठोस पुष्टि नहीं है।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ को बताया कि,
"हमने सभी राजनयिक उपायों का इस्तेमाल किया है। वहाँ के एक प्रभावशाली शेख से भी संपर्क साधा गया, पर बात नहीं बनी। यह एक ऐसा मामला है, जिसमें सरकार की सीमाएं स्पष्ट हैं।"
🙏 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन
'सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल' नामक संगठन ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार ने अब तक किए गए प्रयासों का ब्यौरा पेश किया।
🛡️ आगे क्या?
फिलहाल निमिषा की सज़ा स्थगित हो गई है, लेकिन यह स्थायी राहत नहीं है। भारत सरकार, परिजन और कानूनी टीम अब स्थायी समझौते और क्षमा के लिए प्रयासरत हैं।
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