लांजी नगर परिषद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गुरुवार को सुबह से दोपहर 2 बजे तक बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली गुल रही, जिससे आम जनता, छात्र, दुकानदार और बैंकिंग सेवाएं सभी बुरी तरह प्रभावित हुईं।
📚 बच्चों की पढ़ाई और ऑनलाइन कक्षाएं ठप
स्कूली बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं बाधित हो रही हैं। अभिभावकों ने बताया कि डिजिटल शिक्षा पर निर्भरता के इस दौर में बिजली कटौती से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे अभिभावकों में भी नाराजगी है।
🏪 व्यापार और बैंकिंग सेवाओं पर असर
स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कूलर, कंप्यूटर व मशीनों पर निर्भर काम ठप हो गया। बिजली नहीं होने से बैंकों के एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग और अन्य डिजिटल सेवाएं भी बंद रहीं, जिससे ग्रामीण ग्राहकों को भारी असुविधा हुई।
💬 नगर परिषद अध्यक्ष ने जताया विरोध
नगर परिषद लांजी की अध्यक्ष रेखा ताराचंद कालबेले ने बुधवार रात से गुरुवार दोपहर तक चली कटौती पर कड़ा विरोध दर्ज करते हुए बिजली बोर्ड से पूछा है कि जब बिजली का मेंटेनेंस वर्षभर होता है, तो फिर मानसून में अघोषित कटौती क्यों? उन्होंने विभाग से समय पर पूर्व सूचना देने की मांग की, ताकि जनता वैकल्पिक व्यवस्था कर सके।
🌧️ मानसून में बिजली गुल, परेशान हैं ग्रामीण
बारिश के मौसम में अघोषित कटौती ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है। पेयजल संकट, मच्छरों का प्रकोप, और खराब स्वास्थ्य सुविधाएं बिजली न होने के कारण विकराल रूप ले रही हैं।
⚙️ मेंटेनेंस या लापरवाही?
बिजली विभाग सालभर उपकरणों के रख-रखाव की बात करता है, लेकिन हकीकत ये है कि हर मौसम में घंटों बिजली गायब रहती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मेंटेनेंस के नाम पर बिना योजना के कटौती कर दी जाती है, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित होते हैं।
📢 "बिजली कटौती पर योजनाबद्ध सूचना जरूरी"
बिजली विभाग को चाहिए कि वह हर कटौती की पूर्व घोषणा करे और यह सुनिश्चित करे कि आम जनता को कम से कम असुविधा हो।
— रेखा ताराचंद कालबेले, अध्यक्ष, नगर परिषद लांजी
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