📍 901 करोड़ की सावधि जमा जब्ती को लेकर आरकेएम पॉवरजेन केस में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
⚖️ मुद्दा क्या है?
यह टिप्पणी हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति एम. एस. रमेश और न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने आरकेएम पॉवरजेन प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। कंपनी ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा ₹901 करोड़ की सावधि जमा राशि की जब्ती को चुनौती दी थी।
ईडी ने यह कार्रवाई 2014 में सीबीआई द्वारा दर्ज कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की प्राथमिकी के आधार पर की थी, जिसमें बाद में 2017 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी। हालांकि, 2023 में सीबीआई ने पूरक रिपोर्ट दायर कर पुनः अभियोजन की सिफारिश की थी।
🧾 कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने ईडी की कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा कि—
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ईडी को कानून के अन्य उल्लंघनों की जांच करने का अधिकार नहीं, जब तक कि वह किसी उचित एजेंसी को सूचित न करे।
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ईडी को केवल उसी स्थिति में जांच का अधिकार है जब संबंधित एजेंसी जांच शुरू करती है और अपराध की पुष्टि करती है।
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कोर्ट ने कहा कि PMMLA की धारा 66(2) स्पष्ट रूप से निर्देश देती है कि यदि कोई अन्य कानून का उल्लंघन सामने आता है तो उसे संबंधित एजेंसी को सौंपा जाए, न कि ईडी खुद ही जांच करे।
🧨 "ईडी कोई 'सुपर कॉप' नहीं" – हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
कोर्ट ने कहा –
ईडी कोई ड्रोन नहीं है जो आपराधिक गतिविधि पर अपनी मर्जी से हमला कर दे।
ईडी कोई 'सुपर कॉप' नहीं है जो उसके संज्ञान में आई हर बात की जांच कर सके।
📉 ईडी की कार्यवाही पर सवाल
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