पूजा पाल का आरोप और अखिलेश का पलटवार
पूजा पाल, जो पहले सपा के टिकट पर चायल से विधायक चुनी गई थीं, ने हाल ही में एक पत्र में दावा किया कि उनकी जान को खतरा है और यदि उनकी हत्या होती है, तो इसके लिए सपा और अखिलेश यादव जिम्मेदार होंगे। यह बयान पूजा पाल की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद आया, जिसके बाद सपा ने उन्हें 14 अगस्त 2025 को पार्टी से निष्कासित कर दिया। निष्कासन का कारण पूजा पाल द्वारा विधानसभा में योगी सरकार की कानून व्यवस्था की तारीफ करना और राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को वोट देना बताया गया।
अखिलेश यादव ने रविवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “यह समझ से परे है कि कोई मुख्यमंत्री से मिले और उसे किसी अन्य पार्टी से खतरा महसूस हो। अगर पूजा पाल को खतरा है, तो यह जांच होनी चाहिए कि आखिर खतरा किस संगठन या लोगों से है। क्या भाजपा पूजा पाल को मार देगी और जेल हमें जाना पड़ेगा? इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है, और यह जांच उत्तर प्रदेश सरकार नहीं, बल्कि केंद्र सरकार कराए, क्योंकि हमें यूपी सरकार पर भरोसा नहीं है।”
सपा का गृह मंत्रालय को पत्र
सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पूजा पाल के आरोपों को भाजपा प्रेरित और सपा के खिलाफ साजिश करार दिया। पत्र में कहा गया कि सपा ने पूजा पाल को उनके मुश्किल समय में समर्थन दिया और उन्हें विधायक बनाया। जब उनके पति राजू पाल की हत्या हुई थी, तब सपा और अखिलेश यादव ने उनकी हर संभव मदद की थी। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि पूजा पाल पहले सपा में पूरी तरह सुरक्षित थीं, लेकिन भाजपा के संपर्क में आने के बाद अचानक उन्हें अपनी जान की चिंता होने लगी।
पत्र में सपा ने आरोप लगाया कि पूजा पाल को भाजपा द्वारा मोहरा बनाकर सपा के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से भाजपा को 2027 के विधानसभा चुनाव में हार का डर सता रहा है, और इसी कारण वह पूजा पाल के जरिए सपा की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।
पूजा पाल का इतिहास और विवाद
पूजा पाल के पति राजू पाल, जो बसपा विधायक थे, की 2005 में गैंगस्टर अतीक अहमद के भाई अशरफ और उनके साथियों द्वारा हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पूजा पाल ने अतीक अहमद के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी और सपा में शामिल होकर चायल से विधायक चुनी गईं। हालांकि, हाल के वर्षों में उनके भाजपा के प्रति झुकाव ने सपा के साथ उनके रिश्ते तनावपूर्ण कर दिए।
2024 के राज्यसभा चुनाव में पूजा पाल और सपा के कुछ अन्य विधायकों द्वारा भाजपा उम्मीदवार को वोट देने के बाद सपा ने तीन अन्य विधायकों—मनोज पांडे, राकेश प्रताप सिंह, और अभय सिंह—को निष्कासित कर दिया था, लेकिन पूजा पाल के खिलाफ तब कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, 13 अगस्त 2025 को विधानसभा में योगी आदित्यनाथ की तारीफ करने के बाद सपा ने उन्हें भी पार्टी से बाहर कर दिया।
अखिलेश का योगी सरकार पर हमला
अखिलेश यादव ने योगी सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री दावा करते हैं कि उत्तर प्रदेश में अपराधी भाग गए हैं और कानून का राज है। फिर पूजा पाल को खतरा क्यों महसूस हो रहा है? उन्होंने कहा, “यह गंभीर मामला है। अगर एक विधायक को अपनी जान का खतरा है, तो यह यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता है। केंद्र सरकार को इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।”
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