बैंक ऑफ इंडिया का आरोप
बैंक ऑफ इंडिया ने अगस्त 2016 में RCOM को 700 करोड़ रुपये का ऋण प्रदान किया था, जो कंपनी के चालू पूंजीगत व्यय, परिचालन व्यय और मौजूदा देनदारियों के भुगतान के लिए था। हालांकि, RCOM द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2016 में इस राशि का आधा हिस्सा एक सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) में निवेश किया गया, जो ऋण स्वीकृति पत्र के नियमों के खिलाफ था।
RCOM ने बताया कि उसे 22 अगस्त 2025 को BOI से 8 अगस्त का एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें बैंक ने कंपनी, अनिल अंबानी (प्रवर्तक और पूर्व निदेशक), और मंजरी अशोक कक्कड़ (पूर्व निदेशक) के ऋण खातों को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने का फैसला किया। BOI ने कहा कि RCOM का खाता 30 जून 2017 को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) बन गया था, जिसमें 724.78 करोड़ रुपये बकाया हैं।
SBI और CBI की कार्रवाई
इससे पहले, जून 2025 में SBI ने भी RCOM के ऋण खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित किया था, जिसमें 2,929.05 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया गया। SBI ने आरोप लगाया कि RCOM ने ऋण की शर्तों का उल्लंघन करते हुए धन का दुरुपयोग किया। इसके बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 23 अगस्त 2025 को अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आवास और RCOM से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। CBI ने RCOM और अंबानी के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोपों में मामला दर्ज किया है।
अनिल अंबानी का खंडन
अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने एक बयान में सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा, “SBI और BOI की शिकायतें 10 साल से अधिक पुराने मामलों से संबंधित हैं। उस समय अनिल अंबानी RCOM के गैर-कार्यकारी निदेशक थे और कंपनी के दैनिक प्रबंधन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।” प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि SBI ने अन्य पांच गैर-कार्यकारी निदेशकों के खिलाफ कार्यवाही वापस ले ली, लेकिन अनिल अंबानी को “चुनिंदा रूप से निशाना” बनाया जा रहा है। अंबानी ने कहा कि वह इस मामले में कानूनी रूप से अपना बचाव करेंगे।
RCOM की वित्तीय स्थिति
RCOM, जो अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह का हिस्सा है, लंबे समय से वित्तीय संकट का सामना कर रही है। अप्रैल 2025 में कंपनी ने खुलासा किया था कि उसका कुल कर्ज 40,400 करोड़ रुपये है। कंपनी वर्तमान में दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है और SBI की अगुवाई में एक समिति द्वारा प्रबंधित की जा रही है।
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