इंदौर में दूषित पानी से 10 मौतों की त्रासदी: कांग्रेस ने लापरवाह मंत्री से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की

जबलपुर। इंदौर शहर, जिसे लगातार वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया जाता रहा है, अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। भागीरथपुरा इलाके में नगर निगम की जलापूर्ति पाइपलाइन में सीवर का गंदा पानी मिल जाने से दूषित पानी का संकट पैदा हो गया। इस कारण अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं और जीवन-मरण की स्थिति से जूझ रहे हैं।

टीकाराम कोष्टा

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश उपाध्यक्ष (ओबीसी विभाग) एवं पूर्व प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने इस घटना को "ट्रिपल इंजन सरकार" के घमंड और लापरवाही का परिणाम करार दिया। उन्होंने कहा,

"स्वच्छता और विकास का डंका बजाने वाले इंदौर में शासन, प्रशासन और नगर निगम की गंभीर चूक के कारण दूषित पानी से 10 लोगों की जान चली गई है। कई महीनों से स्थानीय निवासी बदबूदार और गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन विधायक, पार्षद और जिम्मेदार अधिकारी इसे अनसुना करते रहे। अब जब मौतें हुईं तो जिम्मेदार मंत्री पत्रकारों के सवालों पर 'फोकट' और 'घंटी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे लापरवाह जनप्रतिनिधि नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें।"

टीकाराम कोष्टा ने इस संकट को आम जनता की उपेक्षा का प्रतीक बताया और कहा कि सरकार का दावा करने वाली व्यवस्था गरीबों की परेशानियों से पूरी तरह बेखबर है। उन्होंने प्रदेश कोऑर्डिनेटर ओबीसी विभाग अलीम मंसूरी, डॉ. मोइन अंसारी, संजू ठाकुर, विजय अग्रवाल, अशोक यादव, रामदास यादव, मामूर गुड्डू, अशोक चौधरी, पवन नामदेव, संजू शर्मा, धर्मेंद्र कुशवाहा, रविंद्र कुशवाहा सहित अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर इस त्रासदी के लिए नैतिक जवाबदेही की मांग की है।

घटना का विवरण

  • कब शुरू हुई समस्या? दिसंबर 2025 के अंत से भागीरथपुरा के निवासियों ने पानी में बदबू और असामान्य रंग की शिकायत की थी।
  • कारण: जांच में पाया गया कि मुख्य पाइपलाइन में लीकेज हुआ और पुलिस चौकी के ऊपर बने शौचालय से सीवर पानी मिल गया।
  • प्रभाव: लैब रिपोर्ट में ई. कोलाई और अन्य खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि हुई। अब तक 10 मौतें (कुछ रिपोर्टों में 13-15 तक का दावा), 200+ अस्पताल में भर्ती, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल।
  • सरकारी कार्रवाई: एक अधिकारी बर्खास्त, दो सस्पेंड; जांच समिति गठित; हाईकोर्ट में सुनवाई जारी।
  • राजनीतिक प्रतिक्रिया: राहुल गांधी, उमा भारती और अन्य नेताओं ने भी सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ मुआवजे की मांग की है।

यह घटना न केवल इंदौर की स्वच्छता की छवि पर सवाल उठा रही है, बल्कि जनस्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी को भी उजागर कर रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि जिम्मेदार मंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफा दें और पीड़ितों को तत्काल न्याय मिले। प्रशासन द्वारा पानी की टैंकर सप्लाई और मुफ्त इलाज जारी है, लेकिन स्थानीय लोग अब भी डर के साये में जी रहे हैं।

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