नर्मदा मैया को बांधने की धारणा हुई गलत साबित, बरगी बांध विस्थापितों की व्यथा सुनकर भावुक हुआ माहौल

बरगी नगर, 19 जुलाई 2025।
"नर्मदा मैया को कौन बांध सकता है?" — यह विश्वास वर्षों तक बरगी क्षेत्र के लोगों में गूंजता रहा, लेकिन जब बरगी बांध बना और जलस्तर बढ़ा, तब यह आस्था तितर-बितर हो गई। बरगी बांध से विस्थापित हुए लोगों की जिंदगी में आए बदलाव और उनके अधिकारों को लेकर शुक्रवार को "ओरिएंटेशन सह क्षमता वर्धन कार्यशाला" का आयोजन सच्चा प्रयास समिति, बरगी नगर द्वारा किया गया।


विस्थापन, पुनर्वास और अधिकारों पर केंद्रित कार्यशाला

कार्यशाला का आयोजन बरगी क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों के 12 गांवों से आए लगभग 50 प्रतिभागियों की उपस्थिति में हुआ। इसका उद्देश्य विस्थापितों को पुनर्वास नीति, भूमि अधिकार, आजीविका के अवसरों और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।

विशेषज्ञों के संवाद में शामिल प्रमुख विषय:

  • पुनर्वास नीति और ज़मीन पर अधिकार

  • सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया

  • स्थानीय नेतृत्व और समुदाय की भूमिका

कार्यशाला में अधिवक्ता राहुल श्रीवास्तव, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्याम तिवारी और अधिवक्ता पटेल जैसे विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के साथ संवाद किया और उन्हें उनके अधिकारों की व्यावहारिक जानकारी दी।


"नर्मदा को बांध दिया गया... और हम सब उजड़ गए"

कार्यशाला के दौरान विस्थापितों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि –

जब अफसर सर्वे करने आए, तो लोगों को लगा नर्मदा मैया को कोई नहीं बांध सकता। भगवान नहीं रोक पाए तो इंसान क्या कर लेगा? लेकिन हम सब गलत साबित हुए साहब... और नर्मदा बंध गई, हम सब उजड़ गए।

इन मार्मिक शब्दों ने कार्यक्रम में मौजूद सभी को झकझोर दिया। प्रतिभागियों ने समिति द्वारा दी गई जानकारी को अत्यंत उपयोगी बताया और ऐसे कार्यक्रमों की नियमित आवश्यकता जताई।

समिति की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व

कार्यक्रम की शुरुआत सच्चा प्रयास समिति के सचिव परवेज़ खान के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने विस्थापितों के संघर्ष को मान्यता देते हुए उनके हक की लड़ाई में समिति की भूमिका को स्पष्ट किया।

इस अवसर पर समिति की अध्यक्ष रजिया मंसूरी, अनिल रैकवार, ललिता काछी, अफजल खान और सुषमा यादव की विशेष उपस्थिति रही। सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाई।

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✍️ संपादक: दयाल चंद यादव (MCJ)

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