🚨 जिम्मेदार मौन, वाहन दौड़ते बेलगाम
नियमों के अनुसार स्कूल वाहन में अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर, सीट बेल्ट, लोहे की रॉड से युक्त खिड़की, बच्चों की सूची, चालक का पुलिस वेरीफिकेशन और स्कूल का नाम अंकित होना अनिवार्य है। लेकिन लांजी के अधिकांश निजी स्कूल इन मानकों की खुली अवहेलना कर रहे हैं।
🚌 एक ही वाहन में 20 से अधिक बच्चे ठूंसे, सुरक्षा नाममात्र की भी नहीं
नगर में संचालित एक निजी स्कूल के वाहन में करीब दो दर्जन बच्चों को जानवरों की तरह ठूंसा गया। न सीट बेल्ट, न फायर सेफ्टी, न ही आपातकालीन इंतजाम। वाहन चालक ने भी सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग नहीं किया। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में मैजिक, टेंपो और सूमो जैसे वाहनों में मानक से अधिक बच्चों को बैठाकर रोज़ाना सफर कराया जा रहा है।
❌ बिना रजिस्ट्रेशन और फिटनेस के दौड़ रहे 'स्कूल वाहन'
जिला परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, केवल गिने-चुने वाहन ही स्कूली सेवा के लिए रजिस्टर्ड हैं, जबकि बाकी स्कूलों द्वारा निजी वाहनों को स्कूल वाहन बनाकर अवैध तरीके से उपयोग किया जा रहा है। न वाहन पर स्कूल का नाम, न फोन नंबर, न रूट चार्ट — ऐसे वाहन कानून का मज़ाक उड़ाते हुए सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
🧒 बच्चों की जान के साथ खिलवाड़, अभिभावकों की चुप्पी भी चिंता का विषय
यह भी देखा गया कि कई बाइक पर तीन से चार बच्चे बैठकर स्कूली सफर कर रहे हैं। सड़क पर न कोई रोकने वाला है, न कोई पूछने वाला। वहीं अभिभावक भी इस गैरकानूनी प्रक्रिया के प्रति उदासीन दिखाई देते हैं।
📜 क्या कहते हैं स्कूल वाहन नियम?
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वाहन का रंग पीला और "School Vehicle" अंकित होना जरूरी
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फायर एस्टिंग्यूसर और फर्स्ट एड बॉक्स अनिवार्य
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बच्चों की सूची, ब्लड ग्रुप, कक्षा, रूट चार्ट वाहन में चस्पा होना चाहिए
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चालक का पुलिस वेरीफिकेशन और कम से कम 5 वर्षों का अनुभव जरूरी
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खिड़कियों में तीन लोहे की रॉड और सुरक्षा जाली होनी चाहिए
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स्पीड गवर्नर अनिवार्य
🗣️ प्रशासन की चेतावनी: अब होगी सख्त कार्रवाई
एसडीएम कमलचंद सिंहसार ने "अक्षर सत्ता" से बातचीत में कहा:
आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है। यदि निजी स्कूलों द्वारा बच्चों के परिवहन में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो उन्हें सख्त हिदायत दी जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्यवाही की जाएगी।📍 अक्षर सत्ता – तेज़तर्रार आपका अख़बार, जनता के हक़ का पहरेदार
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✍️ संपादक: दयाल चंद यादव (MCJ)
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