मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस घोषणा को "जन-कल्याण" और "ऊर्जा आत्मनिर्भरता" का साझा प्रयास बताया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा –
"हमलोग शुरू से ही सस्ती बिजली दे रहे हैं। अब 1 अगस्त से 125 यूनिट तक कोई बिल नहीं देना होगा। इससे लाखों परिवारों को राहत मिलेगी और बिजली उपभोग में समानता आएगी।"
🔌 बिजली मुफ्त, लेकिन रणनीति पक्की
बिहार में यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब राज्य चुनावी मोड में प्रवेश कर चुका है। जानकारों का मानना है कि यह कदम दिल्ली, पंजाब और हिमाचल जैसे राज्यों के मुफ्त बिजली मॉडल की तर्ज पर वोट बैंक को साधने की कोशिश है।
विश्लेषकों का मानना है कि जैसे दिल्ली में "आप" को और हिमाचल में "कांग्रेस" को फ्री बिजली योजना का फायदा मिला, उसी तरह अब जदयू भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
☀️ अब सूरज बनेगा साथी: बिहार की छतों पर सौर ऊर्जा
नीतीश सरकार केवल मुफ्त बिजली तक सीमित नहीं है, बल्कि अब सौर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी तीन वर्षों में 10,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।
राज्य के सभी घरों की छतों और सार्वजनिक स्थलों पर सोलर प्लांट लगाने की योजना है।
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अत्यंत निर्धन परिवारों को यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त मिलेगी।
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अन्य उपभोक्ताओं को सरकार की ओर से वित्तीय अनुदान मिलेगा।
"कुटीर ज्योति योजना" के तहत यह सोलर विद्युतीकरण किया जाएगा, जिससे बिजली पर राज्य की निर्भरता कम होगी और पर्यावरण के लिहाज से भी यह कदम ऐतिहासिक होगा।
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✍️ संपादक: दयाल चंद यादव (MCJ)
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