विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जरूरी बताते हुए कहा:
यह कार्रवाई न सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है, बल्कि 22 अप्रैल 2024 को हुए पहलगाम हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने के अमेरिका के संकल्प का भी प्रमाण है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि TRF ने पहले भी भारतीय सुरक्षा बलों पर हमलों की जिम्मेदारी ली है और यह संगठन लश्कर-ए-तैयबा की ही एक शाखा के तौर पर काम कर रहा है।
📌 पहलगाम आतंकी हमला: क्या था मामला?
22 अप्रैल 2024 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में एक बड़े आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। TRF ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। यह हमला 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में नागरिकों पर सबसे घातक हमला माना जा रहा है।
🇮🇳 भारत ने अमेरिका के फैसले का स्वागत किया
भारत सरकार ने अमेरिका के इस निर्णय की खुले शब्दों में सराहना की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा:
TRF को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अमेरिका सरकार का आभार। यह भारत-अमेरिका के बीच मजबूत आतंकवाद-विरोधी सहयोग का प्रमाण है।
भारत ने लंबे समय से TRF को लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी संगठन मानते हुए उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध की मांग की थी।
🔎 TRF क्या है?
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TRF (The Resistance Front) की स्थापना 2019 में हुई थी।
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यह संगठन पाकिस्तान में स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है।
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इसका मकसद कश्मीर घाटी में आतंकी हमलों को अंजाम देना और लश्कर की पहचान को छुपाकर नया चेहरा प्रस्तुत करना रहा है।
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TRF ने पिछले कुछ वर्षों में कई हमलों की जिम्मेदारी ली है।
🔐 अमेरिका की कार्रवाई के प्रमुख प्रभाव:
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TRF की अमेरिका में सभी संपत्तियां जब्त होंगी।
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TRF को सहयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था पर कानूनी कार्रवाई संभव होगी।
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वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से जुड़े अन्य देशों को भी इस पर कार्रवाई के लिए प्रेरणा मिलेगी।
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